श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:05 PMIST
रामकृपासनातन भक्ति का संपूर्ण संग्रह
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राम चालीसा

श्री राम · चालीसा · हरिदास (चालीसा में नाम)

चालीसा

राम चालीसा

श्री राम
रचना: हरिदास (चालीसा में नाम)
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राम चालीसा
चौपाई

श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥

निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई॥

ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं॥

दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना॥

जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला॥

तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥

तुम अनाथ के नाथ गोसाईं। दीनन के हो सदा सहाई॥

ब्रह्मादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥

चारिउ भेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखी॥

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चौपाई

श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई॥
ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना॥
जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला॥
तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥
तुम अनाथ के नाथ गोसाईं। दीनन के हो सदा सहाई॥
ब्रह्मादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥
चारिउ भेद भरत हैं साखी। तुम भक्तन की लज्जा राखी॥
गुण गावत शारद मन माहीं। सुरपति ताको पार न पाहिं॥
नाम तुम्हार लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहीं होई॥
राम नाम है अपरम्पारा। चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥
गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो। तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥
शेष रटत नित नाम तुम्हारा। महि को भार शीश पर धारा॥
फूल समान रहत सो भारा। पावत कोऊ न तुम्हरो पारा॥
भरत नाम तुम्हरो उर धारो। तासों कबहूं न रण में हारो॥
नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा। सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥
लखन तुम्हारे आज्ञाकारी। सदा करत सन्तन रखवारी॥
ताते रण जीते नहिं कोई। युद्ध जुरे यमहूं किन होई॥
महालक्ष्मी धर अवतारा। सब विधि करत पाप को छारा॥
सीता राम पुनीता गायो। भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥
घट सों प्रकट भई सो आई। जाको देखत चन्द्र लजाई॥
जो तुम्हरे नित पांव पलोटत। नवो निधि चरणन में लोटत॥
सिद्धि अठारह मंगलकारी। सो तुम पर जावै बलिहारी॥
औरहु जो अनेक प्रभुताई। सो सीतापति तुमहिं बनाई॥
इच्छा ते कोटिन संसारा। रचत न लागत पल की बारा॥
जो तुम्हरे चरणन चित लावै। ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥
सुनहु राम तुम तात हमारे। तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥
तुमहिं देव कुल देव हमारे। तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥
जो कुछ हो सो तुमहिं राजा। जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥
राम आत्मा पोषण हारे। जय जय जय दशरथ के प्यारे॥
जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा। निर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा॥
सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी। सत्य सनातन अन्तर्यामी॥
सत्य भजन तुम्हरो जो गावै। सो निश्चय चारों फल पावै॥
सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं। तुमने भक्तिहिं सब सिधि दीन्हीं॥
ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा। नमो नमो जय जगपति भूपा॥
धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा। नाम तुम्हार हरत संतापा॥
सत्य शुद्ध देवन मुख गाया। बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥
सत्य सत्य तुम सत्य सनातन। तुम ही हो हमरे तन-मन धन॥
याको पाठ करे जो कोई। ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥
आवागमन मिटै तिहि केरा। सत्य वचन माने शिव मेरा॥
और आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावे सोई॥
तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै। तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै॥
साग पत्र सो भोग लगावै। सो नर सकल सिद्धता पावै॥
अन्त समय रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥
श्री हरिदास कहै अरु गावै। सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥

दोहा

सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।
हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय॥

राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।
जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Chaupai

shri raghubir bhakta hitakari| suni lijai prabhu araj hamari||
nishi din dhyan dharai jo koi| ta sam bhakta aur nahin hoi||
dhyan dharen shivaji man manhi| brahma, indra par nahin pahin||
dut tumhar vir hanumana| jasu prabhav tihun pur jana||
jay, jay, jay raghunath kripala| sada karo santan pratipala||
tuv bhujadanda prachanda kripala| ravan mari suran pratipala||
tum anath ke nath gosain| dinan ke ho sada sahai||
brahmadik tav par na pavain| sada ish tumharo yash gavain||
chariu bhed bharat hain sakhi| tum bhaktan ki lajja rakhi||
gun gavat sharad man mahin| surapati tako par na pahin||
nam tumhar let jo koi| ta sam dhanya aur nahin hoi||
ram nam hai aparampara| charihu vedan jahi pukara||
ganapati nam tumharo linho| tinako pratham pujya tum kinho||
shesh ratat nit nam tumhara| mahi ko bhar shish par dhara||
phul saman rahat so bhara| pavat kou na tumharo para||
bharat nam tumharo ur dharo| tason kabahun na ran men haro||
nam shatruhan hriday prakasha| sumirat hot shatru kar nasha||
lakhan tumhare agyakari| sada karat santan rakhavari||
tate ran jite nahin koi| yuddha jure yamahun kin hoi||
mahalakshmi dhar avatara| sab vidhi karat pap ko chhara||
sita ram punita gayo| bhuvaneshvari prabhav dikhayo||
ghat son prakat bhai so ai| jako dekhat chandra lajai||
jo tumhare nit panv palotat| navo nidhi charanan men lotat||
siddhi atharah mangalakari| so tum par javai balihari||
aurahu jo anek prabhutai| so sitapati tumahin banai||
ichchha te kotin sansara| rachat na lagat pal ki bara||
jo tumhare charanan chit lavai| taki mukti avasi ho javai||
sunahu ram tum tat hamare| tumahin bharat kul pujya prachare||
tumahin dev kul dev hamare| tum guru dev pran ke pyare||
jo kuchh ho so tumahin raja| jay jay jay prabhu rakho laja||
ram atma poshan hare| jay jay jay dasharath ke pyare||
jay jay jay prabhu jyoti svarupa| nirgun brahma akhanda anupa||
satya satya jay satyavrat svami| satya sanatan antaryami||
satya bhajan tumharo jo gavai| so nishchay charon phal pavai||
satya shapath gauripati kinhin| tumane bhaktihin sab sidhi dinhin||
gyan hriday do gyan svarupa| namo namo jay jagapati bhupa||
dhanya dhanya tum dhanya pratapa| nam tumhar harat santapa||
satya shuddha devan mukh gaya| baji dundubhi shankh bajaya||
satya satya tum satya sanatan| tum hi ho hamare tan-man dhan||
yako path kare jo koi| gyan prakat take ur hoi||
avagaman mitai tihi kera| satya vachan mane shiv mera||
aur as man men jo hoi| manavanchhit phal pave soi||
tinahun kal dhyan jo lyavai| tulasi dal aru phul charhavai||
sag patra so bhog lagavai| so nar sakal siddhata pavai||
anta samay raghubar pur jai| jahan janma hari bhakta kahai||
shri haridas kahai aru gavai| so baikuntha dham ko pavai||

Doha

sat divas jo nem kar, path kare chit lay|
haridas hari kripa se, avasi bhakti ko pay||

ram chalisa jo parhe, ram charan chit lay|
jo ichchha man men karai, sakal siddha ho jay||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

भगवान श्री राम के गुणों, नाम की महिमा और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन।

महत्व

राम नवमी, गुरुवार और किसी भी शुभ अवसर पर इसका पाठ किया जाता है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और श्री राम के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद श्री राम का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. मंगलवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।