श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:25 PMIST
रामकृपासनातन भक्ति का संपूर्ण संग्रह
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श्री राम रक्षा स्तोत्र

श्री राम · स्तोत्र · बुधकौशिक ऋषि

स्तोत्र

श्री राम रक्षा स्तोत्र

श्री राम
रचना: बुधकौशिक ऋषि
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श्री राम रक्षा स्तोत्र
विनियोग

अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषिः ।
श्रीसीतारामचन्द्रो देवता । अनुष्टुप् छन्दः ।
सीता शक्तिः । श्रीमद् हनुमान कीलकम् ।
श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः ॥

ध्यान

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ।
वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं
नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम् ॥

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विनियोग अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषिः । श्रीसीतारामचन्द्रो देवता । अनुष्टुप् छन्दः । सीता शक्तिः । श्रीमद् हनुमान कीलकम् । श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः ॥

ध्यान ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् । वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम् ॥

स्तोत्र चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥ १॥

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम् ॥ २॥

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तञ्चरान्तकम् ।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥ ३॥

रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥ ४॥

कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥ ५॥

जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः ।
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥ ६॥

करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित् ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥ ७॥

सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।
ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत् ॥ ८॥

जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तकः ।
पादौ बिभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः ॥ ९॥

एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत् ।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥ १०॥

पातालभूतलव्योमचारिणश्छद्मचारिणः ।
न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥ ११॥

रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन् ।
नरो न लिप्यते पापैः भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥ १२॥

जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।
यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥ १३॥

वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत् ।
अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम् ॥ १४॥

आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।
तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥ १५॥

आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् ।
अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान् स नः प्रभुः ॥ १६॥

तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥ १७॥

फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥ १८॥

शरण्यौ सर्वसत्त्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।
रक्षः कुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥ १९॥

आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशावक्षयाशुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम् ॥ २०॥

सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन्मनोरथोऽस्माकं रामः पातु सलक्ष्मणः ॥ २१॥

रामो दाशरथिः शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥ २२॥

वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः ।
जानकीवल्लभः श्रीमान् अप्रमेय पराक्रमः ॥ २३॥

इत्येतानि जपन्नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः ।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥ २४॥

रामं दूर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम् ।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैः न ते संसारिणो नराः ॥ २५॥

रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरम् ।
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम् ।
राजेन्द्रं सत्यसन्धं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम् ।
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम् ॥ २६॥

रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥ २७॥

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ २८॥

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ २९॥

माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु-
र्नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥ ३०॥

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥ ३१॥

लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं
राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् ।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं
श्रीरामचन्द्रम् शरणं प्रपद्ये ॥ ३२॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ ३३॥

कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम् ।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् ॥ ३४॥

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥ ३५॥

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् ।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥ ३६॥

रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहं
रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥ ३७॥

रामरामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनामतत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥ ३८॥

इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

॥ श्रीसीतारामचन्द्रार्पणमस्तु ॥

सरल अर्थ (सार) विनियोग: इस स्तोत्र के ऋषि बुधकौशिक हैं, देवता श्री सीता-रामचंद्र हैं, छंद अनुष्टुप है, शक्ति माता सीता हैं और कीलक श्री हनुमान जी हैं। इसका पाठ श्री रामचंद्र की प्रसन्नता के लिए किया जाता है। ध्यान: घुटनों तक लंबी भुजाओं वाले, धनुष-बाण धारण किए, पद्मासन में बैठे, पीले वस्त्र पहने, कमल जैसे नेत्रों वाले, प्रसन्न श्री राम का ध्यान करें, जिनकी बाईं गोद में माता सीता विराजमान हैं। श्लोक 1 से 3: श्री राम का चरित्र अपार है, उसका एक-एक अक्षर बड़े पापों को नष्ट करने वाला है। नीलकमल जैसे श्याम, कमलनयन, सीता और लक्ष्मण सहित, धनुष-बाण धारी श्री राम का ध्यान करके यह पाठ शुरू करें। श्लोक 4 से 9: यह स्तोत्र का "कवच" भाग है। इसमें शरीर के हर अंग की रक्षा के लिए श्री राम के अलग-अलग नामों से प्रार्थना है: सिर की रक्षा राघव करें, माथे की दशरथनंदन, आँखों की कौसल्यानंदन, और इसी तरह पैरों तक, अंत में पूरे शरीर की रक्षा श्री राम करें। श्लोक 10 से 14: इस रक्षा-स्तोत्र का पाठ करने वाला दीर्घायु, सुखी, संतानवान, विजयी और विनम्र होता है। राम नाम से रक्षित व्यक्ति को धरती, आकाश और पाताल में घूमने वाली बुरी शक्तियाँ देख भी नहीं सकतीं। इसे "वज्रपंजर" यानी वज्र जैसा मज़बूत रक्षा-कवच कहा गया है। श्लोक 15: भगवान शिव ने स्वप्न में यह रामरक्षा बुधकौशिक ऋषि को बताई, और उन्होंने सुबह जागकर इसे लिख दिया। श्लोक 16 से 21: श्री राम सभी विपत्तियों का अंत करने वाले हैं। तरुण, सुंदर, महाबली, तपस्वी वेश में श्री राम और लक्ष्मण से प्रार्थना है कि वे धनुष-बाण लेकर सदा हमारे आगे-आगे चलकर हमारी रक्षा करें। श्लोक 22 से 24: इनमें श्री राम के सोलह नाम हैं (दाशरथि, शूर, काकुत्स्थ, कौसल्येय, रघूत्तम, जानकीवल्लभ आदि)। श्रद्धा से इनका नित्य जप करने वाले को अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक पुण्य मिलता है। श्लोक 25 से 37: श्री राम की सुंदर स्तुति और पूरी शरणागति। श्लोक 30 में भक्त कहता है कि राम ही मेरे माता, पिता, स्वामी और सखा हैं। श्लोक 31 में राम दरबार का ध्यान है, श्लोक 33 में हनुमान जी की और श्लोक 34 में महर्षि वाल्मीकि की वंदना है। श्लोक 36 कहता है कि "राम-राम" का गर्जन यमदूतों को भी डरा देता है। श्लोक 38: भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि "राम" नाम का जप विष्णु सहस्रनाम के बराबर फल देता है। कई पुस्तकों में इसका पहला चरण "श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे" के रूप में भी मिलता है।

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Viniyog

asya shriramarakshastotramantrasya | budhakaushika rishih |
shrisitaramachandro devata | anushtup chhandah |
sita shaktih | shrimad hanumana kilakam |
shriramachandraprityarthe ramarakshastotrajape viniyogah ||

Dhyan

dhyayedajanubahum dhritasharadhanusham baddhapadmasanastham
pitam vaso vasanam navakamaladalaspardhinetram prasannam |
vamankarudha sitamukhakamalamilallochanam niradabham
nanalankaradiptam dadhatamurujatamandanam ramachandram ||

Stotra

charitam raghunathasya shatakoti pravistaram |
ekaikamaksharam punsam mahapatakanashanam || 1||

dhyatva nilotpalashyamam ramam rajivalochanam |
janakilakshmanopetam jatamukutamanditam || 2||

sasitunadhanurbanapanim naktancharantakam |
svalilaya jagattratumavirbhutamajam vibhum || 3||

ramaraksham pathetpragyah papaghnim sarvakamadam |
shiro me raghavah patu bhalam dasharathatmajah || 4||

kausalyeyo drishau patu vishvamitrapriyah shruti |
ghranam patu makhatrata mukham saumitrivatsalah || 5||

jihvam vidyanidhih patu kantham bharatavanditah |
skandhau divyayudhah patu bhujau bhagneshakarmukah || 6||

karau sitapatih patu hridayam jamadagnyajit |
madhyam patu kharadhvansi nabhim jambavadashrayah || 7||

sugriveshah kati patu sakthini hanumatprabhuh |
uru raghuttamah patu rakshahkulavinashakrit || 8||

januni setukritpatu janghe dashamukhantakah |
padau bibhishanashridah patu ramo'khilam vapuh || 9||

etam ramabalopetam raksham yah sukriti pathet |
sa chirayuh sukhi putri vijayi vinayi bhavet || 10||

patalabhutalavyomacharinashchhadmacharinah |
na drashtumapi shaktaste rakshitam ramanamabhih || 11||

rameti ramabhadreti ramachandreti va smaran |
naro na lipyate papaih bhuktim muktim cha vindati || 12||

jagajjaitraikamantrena ramanamnabhirakshitam |
yah kanthe dharayettasya karasthah sarvasiddhayah || 13||

vajrapanjaranamedam yo ramakavacham smaret |
avyahatagyah sarvatra labhate jayamangalam || 14||

adishtavan yatha svapne ramarakshamimam harah |
tatha likhitavan pratah prabuddho budhakaushikah || 15||

aramah kalpavrikshanam viramah sakalapadam |
abhiramastrilokanam ramah shriman sa nah prabhuh || 16||

tarunau rupasampannau sukumarau mahabalau |
pundarikavishalakshau chirakrishnajinambarau || 17||

phalamulashinau dantau tapasau brahmacharinau |
putrau dasharathasyaitau bhratarau ramalakshmanau || 18||

sharanyau sarvasattvanam shreshthau sarvadhanushmatam |
rakshah kulanihantarau trayetam no raghuttamau || 19||

attasajjadhanushavishusprishavakshayashuganishangasanginau |
rakshanaya mama ramalakshmanavagratah pathi sadaiva gachchhatam || 20||

sannaddhah kavachi khadgi chapabanadharo yuva |
gachchhanmanoratho'smakam ramah patu salakshmanah || 21||

ramo dasharathih shuro lakshmananucharo bali |
kakutsthah purushah purnah kausalyeyo raghuttamah || 22||

vedantavedyo yagyeshah puranapurushottamah |
janakivallabhah shriman aprameya parakramah || 23||

ityetani japannityam madbhaktah shraddhayanvitah |
ashvamedhadhikam punyam samprapnoti na sanshayah || 24||

ramam durvadalashyamam padmaksham pitavasasam |
stuvanti namabhirdivyaih na te sansarino narah || 25||

ramam lakshmanapurvajam raghuvaram sitapatim sundaram |
kakutstham karunarnavam gunanidhim viprapriyam dharmikam |
rajendram satyasandham dasharathatanayam shyamalam shantamurtim |
vande lokabhiramam raghukulatilakam raghavam ravanarim || 26||

ramaya ramabhadraya ramachandraya vedhase |
raghunathaya nathaya sitayah pataye namah || 27||

shrirama rama raghunandana rama rama
shrirama rama bharatagraja rama rama |
shrirama rama ranakarkasha rama rama
shrirama rama sharanam bhava rama rama || 28||

shriramachandracharanau manasa smarami
shriramachandracharanau vachasa grinami |
shriramachandracharanau shirasa namami
shriramachandracharanau sharanam prapadye || 29||

mata ramo matpita ramachandrah
svami ramo matsakha ramachandrah |
sarvasvam me ramachandro dayalu-
rnanyam jane naiva jane na jane || 30||

dakshine lakshmano yasya vame tu janakatmaja |
purato marutiryasya tam vande raghunandanam || 31||

lokabhiramam ranarangadhiram
rajivanetram raghuvanshanatham |
karunyarupam karunakaram tam
shriramachandram sharanam prapadye || 32||

manojavam marutatulyavegam
jitendriyam buddhimatam varishtham |
vatatmajam vanarayuthamukhyam
shriramadutam sharanam prapadye || 33||

kujantam ramarameti madhuram madhuraksharam |
aruhya kavitashakham vande valmikikokilam || 34||

apadamapahartaram dataram sarvasampadam |
lokabhiramam shriramam bhuyo bhuyo namamyaham || 35||

bharjanam bhavabijanamarjanam sukhasampadam |
tarjanam yamadutanam ramarameti garjanam || 36||

ramo rajamanih sada vijayate ramam ramesham bhaje
ramenabhihata nishacharachamu ramaya tasmai namah |
ramannasti parayanam parataram ramasya daso'smyaham
rame chittalayah sada bhavatu me bho rama mamuddhara || 37||

ramarameti rameti rame rame manorame |
sahasranamatattulyam ramanama varanane || 38||

iti shribudhakaushikavirachitam shriramarakshastotram sampurnam ||

|| shrisitaramachandrarpanamastu ||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

बुधकौशिक ऋषि का रचा श्री राम रक्षा स्तोत्र: विनियोग, ध्यान और पूरे 38 श्लोक, सरल हिंदी अर्थ के साथ।

महत्व

परंपरा में इसे रक्षा-कवच माना जाता है। रोज़, विशेषकर राम नवमी, मंगलवार और यात्रा से पहले इसका पाठ करने की परंपरा है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और श्री राम के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद श्री राम का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. मंगलवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।

सवाल-जवाब

राम रक्षा स्तोत्र के रचयिता कौन हैं?

इसके ऋषि बुधकौशिक हैं। स्तोत्र के 15वें श्लोक के अनुसार भगवान शिव ने स्वप्न में यह रामरक्षा उन्हें बताई थी और उन्होंने सुबह उठकर इसे लिखा।

राम रक्षा स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?

इसे रोज़ सुबह या शाम पढ़ सकते हैं। राम नवमी, मंगलवार, और किसी यात्रा या कठिन काम से पहले इसका पाठ विशेष माना जाता है। कई लोग इसे 11 या 21 दिन के संकल्प से पढ़ते हैं।

राम रक्षा स्तोत्र में कितने श्लोक हैं?

विनियोग और ध्यान के बाद इसमें 38 श्लोक हैं। श्लोक 4 से 9 "कवच" कहलाते हैं, जिनमें शरीर के हर अंग की रक्षा की प्रार्थना है।