श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:10 PMIST
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आरती श्री रामायण जी की

श्री राम · आरती

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आरती

आरती श्री रामायण जी की

श्री राम
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आरती श्री रामायण जी की

आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिय पी की॥

गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक विज्ञान विशारद।
शुक सनकादि शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥
आरती श्री रामायण जी की॥

गावत वेद पुरान अष्टदस। छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस।
मुनि जन धन सन्तन को सरबस। सार अंश सम्मत सबही की॥
आरती श्री रामायण जी की॥

गावत सन्तत शम्भु भवानी। अरु घटसम्भव मुनि विज्ञानी।
व्यास आदि कविबर्ज बखानी। कागभुसुण्डि गरुड़ के ही की॥
आरती श्री रामायण जी की॥

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आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिय पी की॥

गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक विज्ञान विशारद।
शुक सनकादि शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥
आरती श्री रामायण जी की॥

गावत वेद पुरान अष्टदस। छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस।
मुनि जन धन सन्तन को सरबस। सार अंश सम्मत सबही की॥
आरती श्री रामायण जी की॥

गावत सन्तत शम्भु भवानी। अरु घटसम्भव मुनि विज्ञानी।
व्यास आदि कविबर्ज बखानी। कागभुसुण्डि गरुड़ के ही की॥
आरती श्री रामायण जी की॥

कलिमल हरनि विषय रस फीकी। सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की।
दलन रोग भव मूरि अमी की। तात मात सब विधि तुलसी की॥
आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिय पी की॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

arati shri ramayan ji ki| kirati kalit lalit siy pi ki||

gavat brahmadik muni narad| balamik vigyan visharad|
shuk sanakadi shesh aru sharad| barani pavanasut kirati niki||
arati shri ramayan ji ki||

gavat ved puran ashtadas| chhaon shastra sab granthan ko ras|
muni jan dhan santan ko sarabas| sar ansh sammat sabahi ki||
arati shri ramayan ji ki||

gavat santat shambhu bhavani| aru ghatasambhav muni vigyani|
vyas adi kavibarja bakhani| kagabhusundi garura ke hi ki||
arati shri ramayan ji ki||

kalimal harani vishay ras phiki| subhag singar mukti jubati ki|
dalan rog bhav muri ami ki| tat mat sab vidhi tulasi ki||
arati shri ramayan ji ki| kirati kalit lalit siy pi ki||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

रामचरितमानस या सुंदरकांड के पाठ के बाद गाई जाने वाली आरती।

महत्व

मानस पाठ के समापन पर।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और श्री राम के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. मंगलवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।