श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:56 PMIST
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या कुन्देन्दुतुषारहारधवला

माँ सरस्वती · बुधवार

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥

ya kundendutusharaharadhavala ya shubhravastravrita
ya vinavaradandamanditakara ya shvetapadmasana |
ya brahmachyutashankaraprabhritibhirdevaih sada vandita
sa mam patu sarasvati bhagavati nihsheshajadyapaha ||

अर्थ

जो कुंद के फूल, चंद्रमा, बर्फ़ और मोतियों के हार जैसी उजली हैं, सफ़ेद वस्त्र पहनती हैं, जिनके हाथ वीणा से सुशोभित हैं, जो सफ़ेद कमल पर बैठती हैं, ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि देवता जिनकी सदा वंदना करते हैं, वे सारी जड़ता (अज्ञान) दूर करने वाली माँ सरस्वती मेरी रक्षा करें।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

स्कूल की प्रार्थना और बसंत पंचमी पर यह सबसे प्रचलित वंदना है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; सफ़ेद, पीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और माँ सरस्वती का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; बुधवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
  6. जाप के बाद किताबें जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से बुधवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला का अर्थ क्या है?

जो कुंद के फूल, चंद्रमा, बर्फ़ और मोतियों के हार जैसी उजली हैं, सफ़ेद वस्त्र पहनती हैं, जिनके हाथ वीणा से सुशोभित हैं, जो सफ़ेद कमल पर बैठती हैं, ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि देवता जिनकी सदा वंदना करते हैं, वे सारी जड़ता (अज्ञान) दूर करने वाली माँ सरस्वती मेरी रक्षा करें।

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