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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:10 PMIST
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आरती कुंजबिहारी की

श्री कृष्ण · आरती

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आरती

आरती कुंजबिहारी की

श्री कृष्ण
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आरती कुंजबिहारी की

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।

श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।

लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,

चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

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आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी सिव सीस, जटा के बीच,
हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद,
कटत भव फंद, टेर सुन दीन भिखारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

arati kunjabihari ki, shri giridhar krishnamurari ki||

gale men baijanti mala, bajavai murali madhur bala|
shravan men kundal jhalakala, nand ke anand nandalala|
gagan sam ang kanti kali, radhika chamak rahi ali|
latan men tharhe banamali, bhramar si alak, kasturi tilak,
chandra si jhalak, lalit chhavi shyama pyari ki||
shri giridhar krishnamurari ki||

kanakamay mor mukut bilasai, devata darasan ko tarasain|
gagan son suman rasi barasai, baje murachang, madhur miradang,
gvalin sang, atul rati gop kumari ki||
shri giridhar krishnamurari ki||

jahan te prakat bhai ganga, kalush kali harini shriganga|
smaran te hot moh bhanga, basi siv sis, jata ke bich,
harai agh kich, charan chhavi shribanavari ki||
shri giridhar krishnamurari ki||

chamakati ujjval tat renu, baj rahi vrindavan benu|
chahun disi gopi gval dhenu, hansat mridu mand, chandani chand,
katat bhav phand, ter sun din bhikhari ki||
shri giridhar krishnamurari ki||

arati kunjabihari ki, shri giridhar krishnamurari ki||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

श्री कृष्ण की सबसे प्रसिद्ध आरती।

महत्व

जन्माष्टमी और रोज़ की पूजा में।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और श्री कृष्ण के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. बुधवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।