श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:08 PMIST
रामकृपासनातन भक्ति का संपूर्ण संग्रह
होम › स्तोत्र › कृष्णाष्टकम्

कृष्णाष्टकम्

श्री कृष्ण · स्तोत्र

स्तोत्र

कृष्णाष्टकम्

श्री कृष्ण
पन्ना पलटें →
कृष्णाष्टकम्

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥१॥

अतसीपुष्पसङ्काशं हारनूपुरशोभितम्।
रत्नकङ्कणकेयूरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥२॥

कुटिलालकसंयुक्तं पूर्णचन्द्रनिभाननम्।
विलसत्कुण्डलधरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥३॥

मन्दारगन्धसंयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजम्।
बर्हिपिञ्छावचूडाङ्गं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥४॥

उत्फुल्लपद्मपत्राक्षं नीलजीमूतसन्निभम्।
यादवानां शिरोरत्नं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥५॥

पन्ना 1–2 / 4
पूरा पाठ एक पेज पर पढ़ें

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्।
देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥१॥

अतसीपुष्पसङ्काशं हारनूपुरशोभितम्।
रत्नकङ्कणकेयूरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥२॥

कुटिलालकसंयुक्तं पूर्णचन्द्रनिभाननम्।
विलसत्कुण्डलधरं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥३॥

मन्दारगन्धसंयुक्तं चारुहासं चतुर्भुजम्।
बर्हिपिञ्छावचूडाङ्गं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥४॥

उत्फुल्लपद्मपत्राक्षं नीलजीमूतसन्निभम्।
यादवानां शिरोरत्नं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥५॥

रुक्मिणीकेलिसंयुक्तं पीताम्बरसुशोभितम्।
अवाप्ततुलसीगन्धं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥६॥

गोपिकानां कुचद्वन्द्वकुङ्कुमाङ्कितवक्षसम्।
श्रीनिकेतं महेष्वासं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥७॥

श्रीवत्साङ्कं महोरस्कं वनमालाविराजितम्।
शङ्खचक्रधरं देवं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥८॥

कृष्णाष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत्।
कोटिजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥९॥

॥इति श्री कृष्णाष्टकं सम्पूर्णम्॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

vasudevasutam devam kansachanuramardanam|
devakiparamanandam krishnam vande jagadgurum ||1||

atasipushpasankasham haranupurashobhitam|
ratnakankanakeyuram krishnam vande jagadgurum ||2||

kutilalakasanyuktam purnachandranibhananam|
vilasatkundaladharam krishnam vande jagadgurum ||3||

mandaragandhasanyuktam charuhasam chaturbhujam|
barhipinchhavachudangam krishnam vande jagadgurum ||4||

utphullapadmapatraksham nilajimutasannibham|
yadavanam shiroratnam krishnam vande jagadgurum ||5||

rukminikelisanyuktam pitambarasushobhitam|
avaptatulasigandham krishnam vande jagadgurum ||6||

gopikanam kuchadvandvakunkumankitavakshasam|
shriniketam maheshvasam krishnam vande jagadgurum ||7||

shrivatsankam mahoraskam vanamalavirajitam|
shankhachakradharam devam krishnam vande jagadgurum ||8||

krishnashtakamidam punyam pratarutthaya yah pathet|
kotijanmakritam papam smaranena vinashyati ||9||

||iti shri krishnashtakam sampurnam||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

"कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्" की टेक वाला प्रसिद्ध अष्टक।

महत्व

जन्माष्टमी और रोज़ सुबह पढ़ा जाता है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और श्री कृष्ण के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद श्री कृष्ण का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. बुधवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।