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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:33 PMIST
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सूर्य नवग्रह मंत्र (पौराणिक)

सूर्य देव · रविवार

जपाकुसुमसङ्काशं काश्यपेयं महाद्युतिम् ।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम् ॥

japakusumasankasham kashyapeyam mahadyutim |
tamo'rim sarvapapaghnam pranato'smi divakaram ||

अर्थ

गुड़हल के फूल जैसे लाल, कश्यप ऋषि के पुत्र, महान तेज वाले, अंधकार के शत्रु और सब पापों का नाश करने वाले दिवाकर (सूर्य) को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

नवग्रह शांति के पाठ में सूर्य के लिए यही श्लोक पढ़ा जाता है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; लाल, केसरिया रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और सूर्य देव का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; रविवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 7,000 बार (लगभग 65 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
  6. जाप के बाद गेहूँ जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

सूर्य नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से रविवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

सूर्य नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 7,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।

सूर्य नवग्रह मंत्र (पौराणिक) का अर्थ क्या है?

गुड़हल के फूल जैसे लाल, कश्यप ऋषि के पुत्र, महान तेज वाले, अंधकार के शत्रु और सब पापों का नाश करने वाले दिवाकर (सूर्य) को मैं प्रणाम करता हूँ।

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