श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:32:59 PMIST
रामकृपासनातन भक्ति का संपूर्ण संग्रह
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विनायक चतुर्थी 2026–2027: तारीख और समय

तारीखव्रत और समय
22 जनवरी 2026
गुरुवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:28 AM से 1:36 PM
21 फ़रवरी 2026
शनिवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:26 AM से 1:42 PM
22 मार्च 2026
रविवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:15 AM से 1:41 PM
20 अप्रैल 2026
सोमवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:02 AM से 1:38 PM
20 मई 2026
बुधवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 10:55 AM से 1:39 PM
18 जून 2026
गुरुवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 10:58 AM से 1:46 PM
17 जुलाई 2026
शुक्रवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:04 AM से 1:49 PM
16 अगस्त 2026
रविवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:06 AM से 1:44 PM
14 सितंबर 2026
सोमवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:02 AM से 1:31 PM
14 अक्टूबर 2026
बुधवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 10:58 AM से 1:16 PM
13 नवंबर 2026
शुक्रवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:00 AM से 1:10 PM
13 दिसंबर 2026
रविवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:13 AM से 1:17 PM
11 जनवरी 2027
सोमवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:26 AM से 1:31 PM
10 फ़रवरी 2027
बुधवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:29 AM से 1:41 PM
12 मार्च 2027
शुक्रवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:19 AM से 1:42 PM
10 अप्रैल 2027
शनिवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:06 AM से 1:38 PM
9 मई 2027
रविवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 10:57 AM से 1:38 PM
8 जून 2027
मंगलवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 10:56 AM से 1:43 PM
7 जुलाई 2027
बुधवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:02 AM से 1:49 PM
5 अगस्त 2027
गुरुवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:06 AM से 1:47 PM
4 सितंबर 2027
शनिवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:04 AM से 1:36 PM
3 अक्टूबर 2027
रविवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 10:59 AM से 1:21 PM
2 नवंबर 2027
मंगलवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 10:58 AM से 1:10 PM
1 दिसंबर 2027
बुधवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:07 AM से 1:12 PM
31 दिसंबर 2027
शुक्रवार
विनायक चतुर्थी
मध्याह्न पूजा: 11:21 AM से 1:25 PM

समय कैसे तय होता है

  • सभी समय चुने हुए शहर के हिसाब से हैं। स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो तो अपने पंडित जी की बात मानें।