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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:16 PMIST
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छठ पूजा

अगली बार: रविवार, 15 नवंबर 2026 (14 दिन बाद)

Chhath Puja 2026 kab hai? 15 November 2026, Sunday (Ravivar). Sandhya Arghya (Suryast) (दिल्ली): 15 नवंबर, 5:27 PM

छठ पूजा 2026: चारों दिन की तारीखें

नहाय-खाय
Nahay Khay
13 नवंबर 2026, शुक्रवार
खरना
Kharna
14 नवंबर 2026, शनिवार
संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को)
Sandhya Arghya
15 नवंबर 2026, रविवार
उषा अर्घ्य और पारण (उगते सूर्य को)
Usha Arghya
16 नवंबर 2026, सोमवार

कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव और छठी मैया को डूबते सूर्य का अर्घ्य दिया जाता है।

शुभ मुहूर्त: रविवार, 15 नवंबर 2026

षष्ठी तिथि14 नवंबर, 11:24 PM से 16 नवंबर, 2:01 AM
तिथि का आरंभ और समाप्ति
दिन 1: नहाय-खाय13 नवंबर
स्नान के बाद लौकी-भात और चने की दाल का सात्त्विक भोजन
दिन 2: खरना14 नवंबर, सूर्यास्त 5:28 PM
दिन भर व्रत, शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद
🌇 दिन 3: संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त)15 नवंबर, 5:27 PM
डूबते सूर्य को अर्घ्य
🌅 दिन 4: उषा अर्घ्य (सूर्योदय)16 नवंबर, 6:44 AM
उगते सूर्य को अर्घ्य, फिर व्रत का पारण
अभिजीत मुहूर्त11:44 AM से 12:27 PM
दिन का सबसे शुभ समय

इस समय पूजा शुरू न करें

राहुकाल4:07 PM से 5:27 PM
यमगंड12:05 PM से 1:26 PM

सूर्योदय 6:43 AM, सूर्यास्त 5:27 PM। समय दिल्ली के अनुसार है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें। स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

शहरों के अनुसार समय

शहरसंध्या अर्घ्य (सूर्यास्त)उषा अर्घ्य (सूर्योदय)
दिल्ली5:27 PM6:44 AM
मुंबई6:00 PM6:46 AM
कोलकाता4:52 PM5:49 AM
चेन्नई5:39 PM6:08 AM
बेंगलुरु5:50 PM6:18 AM
हैदराबाद5:40 PM6:21 AM
अहमदाबाद5:55 PM6:53 AM
पुणे5:57 PM6:41 AM
जयपुर5:36 PM6:47 AM
लखनऊ5:15 PM6:26 AM
वाराणसी5:10 PM6:15 AM
अयोध्या5:10 PM6:21 AM
उज्जैन5:42 PM6:41 AM
भोपाल5:35 PM6:34 AM
इंदौर5:42 PM6:40 AM
पटना5:01 PM6:07 AM
नागपुर5:32 PM6:24 AM
सूरत5:57 PM6:49 AM

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छठ पूजा के मंत्र

सूर्य मूल मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ घृणि सूर्याय नमः ।
सूर्य बीज मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ।
सूर्य गायत्री मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि ।
तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥

सूर्य देव के सभी मंत्र →

छठ महापर्व: चार दिन की विधि

  1. पहला दिन, नहाय-खाय: व्रती स्नान करके घर की सफ़ाई करते हैं और लौकी की सब्ज़ी, चने की दाल और भात का सात्त्विक भोजन करते हैं।
  2. दूसरा दिन, खरना: दिन भर निर्जला व्रत रखकर शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
  3. तीसरा दिन, संध्या अर्घ्य: शाम को नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को बाँस के सूप में ठेकुआ, फल और गन्ने के साथ जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है।
  4. चौथा दिन, उषा अर्घ्य: सुबह सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मैया से संतान और परिवार की कुशलता की प्रार्थना की जाती है।
  5. उषा अर्घ्य के बाद व्रती प्रसाद और जल ग्रहण करके व्रत का पारण करते हैं, और प्रसाद सबको बाँटा जाता है।
  6. पूरे पर्व में शुद्धता, सादगी और सात्त्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है; छठ के गीत गाए जाते हैं।

पूजा सामग्री

  • बाँस का सूप और दउरा (टोकरी)
  • ठेकुआ (गुड़-आटे का प्रसाद)
  • गन्ना
  • केले, नारियल, नींबू, मौसमी फल
  • सिंघाड़ा, मूली, अदरक, हल्दी के पौधे
  • दीपक, घी
  • दूध और जल का लोटा (अर्घ्य के लिए)
  • नए वस्त्र

व्रत कथा (संक्षेप में)

छठ सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना का पर्व है। मान्यता है कि छठी मैया सूर्यदेव की बहन हैं और संतान की रक्षा करती हैं।

परंपरा के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम और माता सीता ने अयोध्या लौटने के बाद कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य की उपासना की थी, और महाभारत काल में सूर्यपुत्र कर्ण प्रतिदिन जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे।

एक कथा राजा प्रियव्रत की भी है: संतान न होने से दुखी राजा ने षष्ठी देवी की पूजा की, और उनकी कृपा से उन्हें संतान सुख मिला। तभी से संतान की कुशलता के लिए यह व्रत रखा जाता है।

क्या न करें

  • प्रसाद बनाने में प्याज़-लहसुन और नमक का इस्तेमाल न करें।
  • प्रसाद को जूठा होने से बचाएँ; बनाने से पहले स्नान करें।
  • घाट पर बच्चों और बुज़ुर्गों का ध्यान रखें, गहरे पानी में न जाएँ।
  • व्रती की सेहत ठीक न हो तो डॉक्टर की सलाह लें; 36 घंटे का निर्जला व्रत कठिन होता है।

ठेकुआ प्रसाद बनाने की विधि

सामग्री

  • गेहूँ का आटा: 2 कप
  • गुड़: लगभग 3/4 कप (कद्दूकस किया हुआ)
  • घी: 3 से 4 बड़े चम्मच (मोयन के लिए) और तलने के लिए घी
  • नारियल का बुरादा: 2 बड़े चम्मच
  • सौंफ: 1 छोटा चम्मच, इलायची पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच
  • पानी: लगभग 1/2 कप

विधि

  1. गुड़ को आधा कप गुनगुने पानी में घोल लें और छान लें।
  2. आटे में घी, नारियल, सौंफ और इलायची मिलाएँ और हाथ से अच्छी तरह मसलें, ताकि घी आटे में मिल जाए।
  3. गुड़ के पानी से थोड़ा-थोड़ा करके सख़्त आटा गूँध लें। आटा पूरी के आटे से भी सख़्त होना चाहिए।
  4. छोटी लोइयाँ बनाकर ठेकुआ के साँचे पर दबाएँ, या हथेली पर चपटा करके काँटे से डिज़ाइन बना लें।
  5. घी को मध्यम गरम करें और आँच धीमी-मध्यम रखकर ठेकुआ को दोनों तरफ़ से सुनहरा-भूरा होने तक तलें। तेज़ आँच पर ठेकुआ बाहर से जल जाता है और अंदर कच्चा रहता है।
  6. ठंडा होने पर ठेकुआ कुरकुरा हो जाता है। छठ के प्रसाद में नमक नहीं डाला जाता, और इसे पूरी शुद्धता से, स्नान करके बनाया जाता है।

सवाल-जवाब

छठ पूजा 2026 कब है?

छठ पूजा 2026 में 15 नवंबर 2026, रविवार को है। दिल्ली में 🌇 दिन 3: संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त) 15 नवंबर, 5:27 PM तक है।

Chhath Puja 2026 kab hai?

Chhath Puja 2026: 15 November 2026, Sunday (Ravivar). Sandhya Arghya (Suryast) (दिल्ली): 15 नवंबर, 5:27 PM.

छठ पूजा कितने दिन की होती है?

छठ चार दिन का पर्व है: पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन शाम को डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य और चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को उषा अर्घ्य। ऊपर इस साल की चारों तारीखें दी गई हैं।

छठ में ठेकुआ क्यों बनाते हैं?

ठेकुआ गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बना छठ का मुख्य प्रसाद है। इसे पूरी शुद्धता से, बिना नमक के बनाकर सूप में फलों के साथ सूर्यदेव को अर्पित किया जाता है। विधि नीचे दी गई है।

यह सामान्य पूजा विधि है। अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।