श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:03 PMIST
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गायत्री मंत्र

सूर्य देव · मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

अर्थ

हम उस प्रकाशमान, श्रेष्ठ सविता देव के तेज का ध्यान करते हैं। वे हमारी बुद्धि को सही मार्ग पर प्रेरित करें।

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Om bhurbhuvah svah
tatsaviturvarenyam
bhargo devasya dhimahi
dhiyo yo nah prachodayat||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

ऋग्वेद का मंत्र, जो सविता (सूर्य) देव को समर्पित है। इसे वैदिक परंपरा के सबसे पवित्र मंत्रों में गिना जाता है।

महत्व

सुबह और संध्या के समय इसका जाप करने की परंपरा है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और सूर्य देव के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद सूर्य देव का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।